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At Kanya Vivah & Vikash Society, we believe that meaningful change begins with communication, collaboration, and community participation. Whether you want to learn about our social welfare initiatives, educational activities, women’s empowerment programs, community development projects, or partnership opportunities, we are here to assist you.
We welcome inquiries, suggestions, feedback, and proposals from individuals, volunteers, donors, institutions, and organizations interested in contributing to our mission of social welfare and community development.
We welcome individuals and organizations who share our commitment to education, empowerment, social welfare, and sustainable community development. Together, we can create opportunities, support deserving families, and contribute to a better future.
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कन्या विवाह एण्ड विकास सोसाइटी जो कि संस्था के विकास में सांकेतिक भावनात्मक भाषा और संचार और शारीरिक और गति मापदंडों को महत्वपूर्ण से बढ़ाता है।
दोस्तों, आजादी के इतने वर्ष बित जाने के बाद भी हमारे समाज की बहु-बेटियां शोषित, पिंड़ित और परंतंत्र है। आज भी वे अशिक्षित एवं डरी हुई हैं जो साधारण घरों कि बेटियां है उनकी बाते तो दूर, जो संभ्रान्त परिवार की बलिकायें हैं ये भी डरी हुई हैं। आज साधारण परिवार में पलने और रहने वाले बालिकाओं के डरे रहने की बातें ततो समझ में आती है लेकिन चाहे बड़े उद्योगपती हो, नेता हों, डाक्टर हों, वकिल हों, प्रोफेसर हो या वैसे लोग जो हमारे समाज की रीढ़ हैं, बुनियाद हैं, मार्गदर्शक हैं वे भी अपने बालिकाओं को लेकर भयभीत रहते हैं। उनके घरों से निकलने पर वे भी सोंचने को बेबश हो जाते हैं. कई तरह की आथांका हमेशा बनी रहती है।
विचारणिय विषय तो यह है कि वे कौन से लोग हैं, जिनके वजह से सभी के सभी माता-पिता – भाई भयभीत रहते हैं। आज यदि सर्वे किया जाय तो हम समझते हैं शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिनकी बेटियाँ चुहाएँ घर से निकलें और वे किसी अन्होंनी या आशंका से ग्रसित न हो। इस विचारणिय विषय पर हम सबकों काफी गहराई से सोचना और विचार करना होगा।
हमारे विचार में शादी दो दिलों का बंधन दो विचारों का बंधन दो परिवारों का बंधन है। युग-युगान्तर से चली आ रही यह एक परम्परा है। शादी के बाद वर-वधु एक दुसरे की मानसिकता और भावनातम्क स्थितिए जिम्मेवारियाँ क्षमताओं और जीवन शैली को समझ कर उसके अनुरूप स्वयं का ठालने की मानसिक तैयारियाँ करने का अवसर प्रदान करती है। अभिभावक के सहयोग से तय की गयी विवाह को मानने वाले समाज के द्वारा आप परिणय सूत्र में बांधकर दो परिवार क गरिमा को बचाकर सम्पूर्ण समाज को गौरवान्वित किया है।